इनकी मुस्कान by Deeksha Verma

 

इनकी मुस्कुराहट के पीछे भी एक नमी है,
इनके दिलों में भी हज़ारों ख्वाहिशें दबी हैं।

छूना चाहते है यह उड़कर वो खुला आसमान,
पर पैरों में इनके गरीबी की बेड़ियां पड़ी हैं।
मन में है इनके कुछ बन दिखाने का अरमान,
पर तुम्हारी गंदी नज़रें भी इन पर अड़ी हैं।।

बंद कर देते हो इनका बचपन कारखानों में,
चीख सुनाई नहीं देती इनकी बंद दरवाजों से।
जबरन छुअन से बिलख से जाते है यह अंधेरे में,
अंतरात्मा नहीं सिहरती तुम्हारी इनके आंसू से।।

यह भी तो बच्चे है तुम्हारे बच्चों की तरह,
फिर क्यूं नहीं देहलता दिल इनको सता कर।।
कोशिश तो करो हमें आज़ाद करने की ,
हमारी मुस्कुराहट से तुम्हे भी तसल्ली मिलेगी।।

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